Interpretations
1 of 1वो महकती हुई यादें
कुछ तो खास होता है इन मामूली चीज़ों में, दोपहर की धूप में वो लहराते हुए कपडे, नीचे की छतें जहाँ हर ईंट के नीचे कोई कहानी छुपी है। छत पर टंगी, हर क्लिप, पुराने रूटीन की रखवाली करती है, हर सिलवट याद दिलाती है कि ये कपड़े सिर्फ़ पहने नहीं बल्कि जिए भी गए हैं। वो पुरानी मेज़, जिस पर पड़ा अख़बार किनारों से मुड़ा है, चुपचाप उस इंतेज़ार में, कि कोई आकर दिन वहीं पे जिए जहाँ छोड़ा था। एक तरफ वो चलता पूरा शहर और दूसरी तरफ एक कोने में वो ठहरा हुआ पल, धुप और कपड़ों के बीच वो महकती हुई यादें, शायद इसी वजह से ये पल सबसे कीमती लगते हैं, यही ठहराव सिखाता है कि असली ज़िन्दगी वहीं मिलती है जहाँ कुछ भी असाधारण नहीं होता, बस साँस लेना ही काफी होता है।
आपका कौन सा दोस्त तस्वीरों में कहानियां ढूंढता है?