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1 of 1बाज़ार के मोल भाव तक
प्रकृति की गोद से बाज़ार के मोल भाव तक, रंगों की मानो एक अलग सी दुनिया में ये रंग बिरंगी सब्ज़ियाँ और फल, हर तरफ शोर के बीच वो नन्ही सी खामोश ज़िंदगी जिसके लिए ये थोड़ी सी मूंगफली ही मानो उसका सबसे बड़ा खजाना हो। प्लास्टिक की टोकरी के बीच कभी इधर तो कभी उधर दौड़ती मासूमियत। समय से पहले पूरा सामान बिकने की खुशी और कभी बचे हुए सामान के खराब होने की फ़िक्र में ज़िंदगी यूँ ही बस चलती रहती है। कभी-कभी कुछ सवाल मन में आते हैं जैसे - जिस दिन कुछ सामान बच जाए तो उसके खराब होने की चिंता में क्या वो उन ग्राहकों को याद करते होंगे जो सिर्फ कुछ पैसे ना कम करने की वजह से खाली हाथ चले गए? और जिस दिन पूरा सामान समय से पहले बिक जाए तो क्या उनके दिमाग में ये सवाल आता होगा कि कहीं सस्ते में तो नहीं बेच दिया? खैर, हर पल ये कभी कम तो कभी ज्यादा का खेल ज़िंदगी का
आपका कौन सा दोस्त तस्वीरों में कहानियां ढूंढता है?