Interpretations
1 of 1
अँधेरे और उजाले के बीच की वो कभी ना दिखाई देने वाली लड़ाई। उन शांत गलियों में हर दिन जिंदा होते वो दोस्ती और बचपन। कभी ना दिखने वाली खेल की सिर्फ मानी हुई सीमाएं तोड़ता हर चौक। दोस्ती की ख़ुशी में वो हल्के से झुके हुए खेल के नियम। भूख-प्यास भूल कर कभी ना पूरी होने वाली वो लगातार खेलने की ख्वाहिश, आज चरम पर है। पुरानी यादों का भाव लिए वो खिड़की से खेल का आनंद उठाते पड़ोसियों की हंसी। साथ में मिलकर उठे उस खेल के शोर में मोहल्ले की एकता। दिल आख़िर मान ही जाता है कि असली ख़ुशी बस खुले आसमान में हंसी और रोशनी की संगत में छुपी है।
आपका कौन सा दोस्त तस्वीरों में कहानियां ढूंढता है?